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किसान आंदोलन थमा नहीं कि जाट आरक्षण की फिर जोर पकड़ रही मांग; भाजपा की बढ़ेगी परेशानी

Published On :    24 Nov 2021   By : MN Staff
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एक तरफ किसान आंदोलनकारियों ने कृषि कानून के वापसी के ऐलान के बाद भी घर लौटने से इनकार कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ यूपी में जाट आरक्षण की मांग फिर से तेज हो गई है.



मेरठ : तीन नए कृषि कानूनों की वापसी के बाद भी उत्तर प्रदेश समेत 5 राज्यों के चुनावी संघर्ष को पहले से आसान समझ रही भाजपा की मुश्किलें अब भी कम होती नजर नहीं आ रही है. एक तरफ किसान आंदोलनकारियों ने कृषि कानून के वापसी के ऐलान के बाद भी घर लौटने से इनकार कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ यूपी में जाट आरक्षण की मांग फिर से तेज हो गई है. यदि यह मांग जोर पकड़ती है तो फिर जाट बिरादरी का समर्थन हासिल करने में भाजपा को मुश्किल हो सकती है.



अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने जाट आरक्षण को लेकर बड़ा ऐलान किया है. मंगलवार को जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा है कि जाट आरक्षण की लड़ाई सड़कों पर नहीं वोट से होगी. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने 2015-2017 में आरक्षण का वादा किया था. वादा किया है तो निभाना पड़ेगा. जाट समाज अब आरक्षण के लिए राजनीतिक संघर्ष के लिए तैयार हो गया है. उन्होंने कहा कि जाट आरक्षण आंदोलन तो कृषि कानून के विरोध में हुए मूवमेंट से भी बड़ा है.


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अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति की मेरठ और सहारनपुर मंडल के पदाधिकारियों की बैठक मेरठ में चैपल स्ट्रीट स्थित रेस्टोरेंट में हुई. बैठक में संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा कि केंद्र सरकार ने जाट समाज के प्रमुख संगठनों, मंत्रियों, सांसदों, विधायकों की उपस्थिति में केंद्रीय स्तर पर जाट आरक्षण का वादा किया था. 2017 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी विरेंद्र सिंह के आवास पर आरक्षण का भरोसा दिलाया गया था. यशपाल मलिक ने कहा कि सरकार की ओर से 2019 लोकसभा चुनाव से पहले भी जाट समाज के सामने वायदे किए गए थे. हमारी मांगें लंबित हैं, जिन्हें अब पूरा करने वक्त है.



यशपाल मलिक ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 125 विधानसभा सीट के साथ ही उत्तराखंड की 15 तथा पंजाब की 100 से अधिक सीट पर जाटों का प्रभाव है. उन्होंने कहा कि अगले साल जाटों के प्रभाव वाले इन तीनों राज्यों में विधानसभा चुनाव है. इन चुनावों में जाटों का वोट उसी दल को जाएगा जो उन्हें आरक्षण देगा. मलिक ने कहा कि केंद्र सरकार ने केंद्रीय स्तर पर जाट आरक्षण का वादा किया था और 2017 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आरक्षण का भरोसा दिया गया था. मलिक ने कहा कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भी जाट समाज से वादे किए गए.



यशपाल मलिक ने कहा कि हम इस बार सड़क पर आरक्षण की लड़ाई नहीं लड़ेंगे बल्कि वोट से लड़ेंगे. यशपाल मलिक ने कहा कि सात मंडलों में 124 विधानसभा सीटों पर जाट समाज का असर है. जाट आरक्षण नहीं मिला तो फिर हम राजनीतिक निर्णय के लिए बाध्य होंगे. मलिक ने चुनाव के समय आरक्षण की मांग पर कहा कि राजनीतिक फैसले जब चुनाव के समय होते हैं तो संघर्ष भी इसी समय होगा. उन्होंने कहा कि अब वादा नहीं आरक्षण चाहिए.



उन्होंने कहा, ‘जाट ख़ुद को ठगा सा महसूस कर रहा है, उसके वोट से भाजपा ने केंद्र और फिर उत्तर प्रदेश में सरकार तो बना ली. लेकिन उसे उसका हक़ नहीं दिया गया. पदाधिकारियों ने कहा कि वर्षों से जाट समाज आरक्षण के लिए संघर्ष कर रहा है. आरक्षण संघर्ष समिति जाट समाज को केंद्रीय स्तर पर ओबीसी श्रेणी में शामिल करने के लिए लंबे समय से मांग कर रही है. समय-समय पर सरकार के प्रतिनिधियों से वार्ता भी की गई, लेकिन सरकार की ओर से जाट समाज को अब तक केंद्रीय स्तर पर ओबीसी में शामिल करने के लिए फैसला नहीं किया गया.



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