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गुजरात दंगे को सोच समझकर अंजाम दिया गया, जाकिया जाफरी के वकील कपिल सिब्बल का आरोप

Published On :    24 Nov 2021   By : MN Staff
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यह एक ऐसा मामला है, जहां कानून की महिमा गंभीर रूप से तार-तार हुई है. गोधरा की घटना के बाद के दंगों को राष्ट्रीय त्रासदी बताते हुए सिब्बल ने कहा



नई दिल्ली : गुजरात दंगों के दौरान बड़ी साजिश का आरोप लगाने वालीं जकिया जाफरी के वकील कपिल सिब्बल ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में जाफरी द्वारा रिकॉर्ड पर रखी गई सामग्री का जिक्र करते हुए कहा, ये हत्या या की गई हिंसा के किसी एक व्यक्तिगत मामले से संबंधित नहीं हैं. यह ऐसी हिंसा है जिसे सोच-समझकर अंजाम दिया गया था और दस्तावेजों से इसका पता चलता है.



सिब्बल ने कहा, यह एक ऐसा मामला है, जहां कानून की महिमा गंभीर रूप से तार-तार हुई है. गोधरा की घटना के बाद के दंगों को राष्ट्रीय त्रासदी बताते हुए सिब्बल ने कहा, याचिकाकर्ता इस बात से चिंतित है कि कानून की महिमा ऐसे मुद्दों से कैसे निपटेगी जब लोग जानवरों की तरह व्यवहार करते हैं.



अहमदाबाद में 28 फरवरी 2002 को गुलबर्ग सोसाइटी में हिंसा के दौरान मारे गए कांग्रेस नेता एहसान जाफरी की पत्नी जकिया जाफरी ने दंगों के दौरान गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी समेत 64 लोगों को एसआईटी द्वारा दी गई क्लीन चिट को चुनौती दे रखी है.



सिब्बल ने कहा कि ये दस्तावेज आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा हैं और विशेष जांच दल (एसआईटी) ने इन पहलुओं की जांच ही नहीं की. उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता किसी विशेष व्यक्ति का जिक्र नहीं कर रही और न ही किसी के खिलाफ मुकदमा चलाने की उनकी इच्छा है. सिब्बल ने कहा, यह मुद्दा व्यक्तियों पर मुकदमा चलाने के मुद्दे से बहुत व्यापक है. यह इस देश की राजनीति से संबंधित है.


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यह उस तौर-तरीके से संबंधित है जिसमें संस्थानों को राष्ट्रीय आपातकाल में कार्य करना होता है. यह एक राष्ट्रीय आपातकाल था. साबरमती में जो हुआ, वह राष्ट्रीय आपातकाल था. साबरमती एक्सप्रेस के एक डिब्बे को गोधरा में जला दिया गया था, जिसमें 59 लोगों की मौत हो गई थी इसके बाद में गुजरात में दंगे हुए थे.
बहस के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि साबरमती एक्सप्रेस की घटना के बाद जो हुआ वह राष्ट्रीय त्रासदी की तरह था. सिब्बल ने कहा, मैं संविधान को देख रहा हूं और खुद से कह रहा हूं, हमारे सिस्टम में कानून के राज के तहत क्या इसकी अनुमति दी जा सकती है और अगर इसकी अनुमति दी जा रही है तो हमारी रक्षा कौन करेगा?



सिब्बल ने कहा कि विशेष जांच दल ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध कई पहलुओं और सामग्रियों की जांच नहीं की थी और निचली अदालत ने भी इस पर गौर नहीं किया. उन्होंने कहा कि शायद ही किसी के पास साजिश का प्रत्यक्ष सबूत हो सकता है और यह परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित है जो जांच होने पर ही सामने आएगा.



उन्होंने कहा, यदि आप जांच नहीं करते हैं तो आप कभी भी परिस्थितियों का पता नहीं लगा पाएंगे और आप कभी भी साजिश का पता नहीं लगा पाएंगे. सिब्बल ने अपनी दलील में कहा, मै यहां साजिश स्थापित करने के लिए नहीं हूं. यह मेरा काम नहीं है. यह एसआईटी का काम है. सिब्बल ने कहा, मेरी शिकायत यह है कि उन्होंने इसकी जांच नहीं की. सिब्बल ने अपनी दलील यह कहते हुए समाप्त की, गणतंत्र एक जहाज की तरह है, इसे स्थिर बनाना होगा और जहाज केवल तभी स्थिर रहेगा जब कानून की महिमा कायम रहे.



पीठ ने सिब्बल की दलील सुनने के बाद कहा कि वह एसआईटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी की दलीलें बुधवार को सुनेगी. सिब्बल ने इससे पहले दलील दी थी कि जकिया जाफरी की 2006 की शिकायत यह थी कि एक बड़ी साजिश हुई थी जहां नौकरशाही की निष्क्रियता, पुलिस की मिलीभगत, नफरत भरे भाषण-नारेबाजी और हिंसा को बढ़ावा दिया गया था.



गोधरा ट्रेन की घटना के बाद हुई हिंसा में पूर्व सांसद एहसान जाफरी सहित 68 लोग मारे गए थे. एसआईटी ने मोदी और वरिष्ठ अधिकारियों सहित अन्य 63 को क्लीन चिट देते हुए 2012 में दाखिल क्लोजर रिपोर्ट में कहा गया था कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने योग्य कोई सबूत नहीं है. जकिया जाफरी ने शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर कर गुजरात हाईकोर्ट के पांच अक्टूबर 2017 के आदेश को चुनौती दी है जिसमें एसआईटी के फैसले के खिलाफ उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी.
 



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