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कम होगी देश की आबादी! प्रजनन दर में आई बड़ी गिरावट, जम्मू-कश्मीर मे सबसे कम

Published On :    25 Nov 2021   By : MN Staff
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आरएसएस और उससे संबंधित संगठनाएं मुस्लिमों को निशाना बनाकर देश में जनसंख्या नियंत्रण नीति लाए जाने की वकालत कर रही है. इस बीच एक चौकाने वाली जानकारी सामने आई है.



नई दिल्ली : भाजपा के कुछ नेता सहीत आरएसएस और उससे संबंधित संगठनाएं मुस्लिमों को निशाना बनाकर देश में जनसंख्या नियंत्रण नीति लाए जाने की वकालत कर रही है. इस बीच एक चौकाने वाली जानकारी सामने आई है. वह यह कि देश की आबादी कम होन वाली है, क्योंकि कुल प्रजनन दर या कहें अपने जीवन काल में एक महिला द्वारा कुल बच्चों को जन्म देने वाली औसत संख्या प्रतिस्थापन दर से नीचे आकर अब 2 हो गई है. इसका खुलासा नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के डाटा 2019-21 से हुआ है, जिसे बुधवार को जारी किया गया. प्रतिस्थापन दर टीएफआर, उसे कहते हैं जिसमें एक पीढ़ी, दूसरी पीढ़ी को रिप्लेस करती है. सर्वे के मुताबिक रिप्लेसमेंट दर 2.1 है. सर्वे के मुताबिक बिहार 3.0, उत्तर प्रदेश 2.4 और झारखंड 2.3 में कुल प्रजनन दर, प्रतिस्थापन दर से ज्यादा है.



2005-06 में नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-3 के दौरान भारत का टीएफआर 2.7 था, जोकि 2015-16 में घटकर 2.2 हो गया है. दूसरी ओर एनएफएच-3 और 2019-21 में हुए ताजा एनएफएच-5 के बीच देश की ज्यादा आबादी वाले राज्यों मसलन, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार में टीएफआर में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, इस वजह से देश की कुल प्रजनन दर में गिरावट आई है और प्रतिस्थापन दर से नीचे चली गई है.


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एनएफएच-5 का पहला चरण 17 जून 2019 से 30 जनवरी 2020 के बीच किया गया था और दूसरा चरण 2 जनवरी 2020 से 30 अप्रैल 2021 तक चला था. फेज-1 में 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को टारगेट किया गया था. दूसरे चरण में 14 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश शामिल थे. बिहार को छोड़ दें तो अन्य सभी राज्यों में शहरी टीएफआर प्रतिस्थापन दर से नीचे है. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी कुल प्रजनन दर सिर्फ बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में ज्यादा है. वहीं मेघालय, मणिपुर और मिजोरम जैसे छोटे राज्यों के ग्रामीण इलाकों में भी कुल प्रजनन दर ज्यादा है.



बड़े राज्यों में कुल प्रजनन दर सबसे कम जम्मू और कश्मीर में 1.4 है. 2015-16 में हुए पिछले एनएफएचएस सर्वे के बाद से जम्मू कश्मीर ही वह राज्य है, जहां कुल प्रजनन दर में सबसे ज्यादा गिरावट (0.6) दर्ज की गई है.एनएफएचएस-4 में केरल और पंजाब की कुल प्रजनन दर 1.6 थी, जबकि तमिलनाडु में यह 1.7 थी. नए सर्वे में पंजाब में कुल प्रजनन दर 1.6 ही है, लेकिन केरल और तमिलनाडु की कुल प्रजनन दर में इजाफा दर्ज किया गया है. दोनों में टीएफआर 2019-21 में बढ़कर 1.8 हो गई है. सबसे कम प्रजनन दर सिक्किम की 1.1 है.



सिक्किम की प्रजनन दर दुनिया में सबसे कम दक्षिण कोरिया की प्रजनन दर के बराबर है. यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन डाटा के मुताबिक सबसे ज्यादा प्रजनन दर नाइजर (6.9) और सोमालिया (6.1) की है. अगर भारत के पड़ोसी राज्यों की बात करें तो नेपाल में कुल प्रजनन दर भारत और बांग्लादेश के बाद सबसे कम है. एशिया की कुल प्रजनन दर 2.15 है, जोकि प्रतिस्थापन दर से थोड़ा ज्यादा है.



एनएफएचएस के मुताबिक देश में पुरुषों के मुकाबले अब महिलाओं की संख्या ज्यादा हो गई है. सर्वे के ताज़ा आंकड़ों में कहा गया है कि भारत में अब 1000 पुरुषों पर 1020 महिलाएं हैं. इन आंकड़ों से ये साफ है कि भारत में अब महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. जबकि इससे पहले हालात कुछ अलग थे. 1990 के दौर में हर 1000 पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या महज 927 थी. साल 2005-06 में हुए तीसरे एनएफएचएस सर्वे में ये 1000-1000 के साथ बराबर हो गया. इसके बाद 2015-16 में चौथे सर्वे में इन आंकड़ों में फिर से गिरावट आ गई. हजार पुरुषों के मुकाबले 991 महिलाएं थीं. लेकिन पहली बार अब महिलाओं के अनुपात ने पुरुषों को पीछे छोड़ दिया है. यही नही तों ज्यादा मुस्लिम आबादी वाले राज्यों में भी कुल प्रजनन दर में गिरावट आई है.



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