×
भारत /

भुखमरी की दहलीज पर खड़ा देश

Published On :    7 May 2022   By : MN Staff
शेयर करें:


लॉकडाउन की भयंकर मार, भूख से बिलबिला उठे करोड़ों परिवार 2021 में रिकॉर्ड संख्या में लोग पर्याप्त भोजन से वंचित रहे : संयुक्त राष्ट्र



संयुक्त राष्ट्र : एक तरह जहां दुनिया भर में गरीबी घट रही है तो वहीं दूसरी तरफ भारत में गरीबी रिकार्डतोड़ बढ़ रही है. इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कोरोना वायरस संक्रमण ने केवल साल 2020 के दौरान 23 करोड़ भारतीयों को गरीबी में धकेल दिया है, बल्कि उनको भुखमरी की उस दहलीज पर खड़ा कर दिया है जहां से चारों तरफ केवल मंजर ही मंजर नजर आ रही है. कोरोना महामारी से कम लॉकडाउन से ज्यादा असर पड़ा है. हालांकि इसका सबसे ज्यादा मार युवाओं और महिलाओं पर पड़ी है. 


कोरोना वायरस की तीसरी लहर ने संकट को पहले से और ज्यादा बढ़ा दिया. बेंगलुरु की अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट में कहा गया था कि मार्च 2020 से भारत में लगाए गए सख्त लॉकडाउन ने करीब 10 करोड़ लोगों से रोजगार छीन कर भुखमरी की चपेट में झोंक दिया. क्योंकि, 15 फीसदी को साल खत्म होने तक काम ही नहीं मिला था. जबकि, महिलाओं पर इसका बहुत ज्यादा बुरा असर पड़ा. करीब 47 फीसदी महिलाएं पाबंदियां के खत्म होने के बाद भी रोजगार हासिल नहीं कर पाईं.


गौरतलब है कि यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट में उन लोगों को गरीब माना गया है, जिनकी दैनिक आमदनी 375 रुपये से कम है. इसमें कहा गया है कि सबकी आमदनी घटी है, लेकिन महामारी का प्रकोप गरीबों पर सबसे ज्यादा पड़ा है. एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थ्या कोविड-19 के पहले से ही सुस्ती के दौर से गुजर रही थी, लेकिन महामारी ने इसे और धीमा कर दिया. एक अनुमान था कि पिछले साल 5 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठ जाते, लेकिन इसके बजाय 20 फीसदी परिवारों की आमदनी 2020-21 में पूरी तरह खत्म हो गई. हालात कितने बदतर हो गए इसका अनुमान एक अध्ययन में शामिल 20 फीसदी लोगों से लगाया जा सकता है जिन्होंने बताया कि 1 साल बाद भी उनके खाने-पीने में सुधार नहीं हुआ है.


संयुक्त राष्ट्र की ओर से कहा गया है कि 53 देशों में लगभग 19.3 करोड़ लोगों को 2021 में खाद्य असुरक्षा का सामना करना पड़ा और यह स्थिति संघर्ष, असामान्य मौसम और कोविड-19 वैश्विक महामारी के आर्थिक प्रभावों की तिहरी मार के कारण उत्पन्न हुई. यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध की वजह से वैश्विक खाद्य उत्पादन प्रभावित होने से यह स्थिति और भयावह होने जा रही है. संयुक्त राष्ट्र ने कहा है ऐसे लोगों की संख्या पिछले साल सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई, जिन्हें रोजाना पर्याप्त भोजन नसीब नहीं हुआ. विश्व निकाय के मुताबिक, यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध की वजह से वैश्विक खाद्य उत्पादन प्रभावित होने से यह स्थिति और भयावह होने जा रही है.


संयुक्त राष्ट्र ने बुधवार (चार मई) को कहा कि 53 देशों में लगभग 19.3 करोड़ लोगों को 2021 में खाद्य असुरक्षा का सामना करना पड़ा और यह स्थिति संघर्ष, असामान्य मौसम और कोविड-19 वैश्विक महामारी के आर्थिक प्रभावों की ‘तिहरी मार’ के कारण उत्पन्न हुई है. संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि पिछले साल पर्याप्त भोजन न पाने वाले लोगों की संख्या में करीब चार करोड़ की वृद्धि हुई, जो पिछले कुछ वर्षों से ऐसी बढ़ती संख्या को दर्शाती है, जो चिंताजनक है. खाद्य संकट पर वैश्विक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है. 



यह भी पढ़े : खाना छीन रही सरकार आम जनता की थाली से



संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन, विश्व खाद्य कार्यक्रम और यूरोपीय संघ द्वारा संयुक्त रूप से इस रिपोर्ट को तैयार किया है. रिपोर्ट के अनुसार, हिंसक संघर्ष व टकराव खाद्य असुरक्षा के बड़े कारणों में है, जिसकी वजह से 24 देशों/क्षेत्रों में 13 करोड़ 90 लाख लोग पिछले कुछ समय में खाद्य असुरक्षा का शिकार हुए हैं. वर्ष 2020 में 23 देशों/क्षेत्रों में यह संख्या 9 करोड़ 90 लाख थी.


रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान, कांगो, इथियोपिया, नाइजीरिया, दक्षिण सूडान, सीरिया और यमन सहित लंबे संघर्षों का सामना करने वाले देशों में पर्याप्त भोजन से वंचित लोगों की संख्या अधिक रही. रिपोर्ट के अनुसार, चरम मौसम की घटनाओं के कारण आठ देशों या क्षेत्रों में दो करोड़ 30 लाख से अधिक लोगों के लिए हालात विकट हुए हैं. रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया है कि लंबे समय तक सूखे, खाद्य कीमतों में वृद्धि और लगातार हिंसा के कारण सोमालिया को 2022 में दुनिया के सबसे खराब खाद्य संकट के दौर का सामना करना पड़ेगा. 


संयुक्त राष्ट्र ने कहा, ‘आज, अगर ग्रामीण समुदायों की मदद करने के लिए और अधिक कदम नहीं उठाए गए तो भुखमरी तथा आजीविका संकट भयावह स्तर पर पहुंच जाएगा. ऐसी स्थिति से बचने के लिए बड़े पैमाने पर तत्काल मानवीय दृष्टिकोण को अपनाते हुए कार्रवाई की आवश्यकता है. यूक्रेन में युद्ध सोमालिया तथा कई अन्य अफ्रीकी देशों के लिए और अधिक संकट पैदा कर रहा है, क्योंकि गेहूं, उर्वरक और अन्य खाद्य आपूर्ति के लिए ये देश यूक्रेन और रूस पर निर्भर हैं.


विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) के मुख्य अर्थशास्त्री आरिफ हुसैन ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एजेंसी का अनुमान है कि यूक्रेन में युद्ध के कारण खाद्य पदार्थों व ईंधन की बढ़ती कीमतों और मुद्रास्फीति के परिणामस्वरूप 4.7 करोड़ और लोगों को खाद्य संकट का सामना करना पड़ सकता है.



PAY BACK TO THE SOCIETY NATIONWIDE AGITATION FUNDDonate Here



संपर्क करें

आपके पास अगर कोई महत्वपुर्ण जानकारी, लेख, ओडीयो, विडीयो या कोई सुझाव हैै तो हमें नीचे दिये ई-मेल पर मेल करें.:

email : news@mulniwasinayak.com


MN News On Facebook

लोक​प्रिय
ज्ञानवापी में नहीं है कोई शिवलिंग, ताकत के बलबूते बनाया ज
सपा से अलग हुए आजम तो जमीन पर आ जाएंगे, उनके पास दूसरा वोटब
केंद्र पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाकर थपथपा रहा अप
ऑक्सफैम ने कहा- कोरोना महामारी ने हर 30 घंटे में बनाया एक नय
पश्चिम बंगाल में बीजेपी को एक और झटका, सांसद अर्जुन सिंह न
पूर्व जस्टिस मदन बी. लोकुर बोले- राजद्रोह से भी ज्यादा ख़त
एमपी में 29 तो राजस्थान में हर दिन 14 बच्चे हुए गुम, लड़कियों क
मुगलों ने मिल बैठकर ब्राह्मणों और मुगलों दोनों का मंदिर
महंगाई के बीच मुफ्त मिलनेवाली राशन पर आफत, इन लोगों को नही
महबूबा मुफ्ती बोली- जिन्न को बोतल में बंद करने जैसा था भाज
मुसलमान होने के शक में जैन बुजुर्ग की पीट-पीट कर हत्या, पू
मुस्लिम महिलाओं को रेप की धमकी देने वाले महंत बजरंग मुनि
गुजरात में बीजेपी को बड़ा झटका, आदिवासियों के लगातार विरो
पैंगोंग झील पर जारी गतिरोध के बीच रेलवे ने दिया सुपरफास्
आरजेडी का मोदी-शाह पर हमला, रेलवे को हजारों करोड़ का मुनाफा
वसुंधरा समर्थकों का चुनाव में मोदी को चेहरा मानने से इंक
ज्ञानवापी मस्जिद केसः ‘शिवलिंग’ पर टिप्पणी करने पर डीयू
जम्मू-कश्मीर में दिन पर दिन बिगड़ते जा रहे हैं हालात, उमर अ
हनुमान चालीसा, अजान, हिजाब, शिवलिंग विवाद खड़ा करने का मकसद
शिक्षा मंत्री की बेटी को झटका, हाई कोर्ट ने दिए बर्खास्त क
COPYRIGHT

All content © Mulniwasi, unless otherwise noted or attributed.


ABOUT US

It is clear from that the lack of representation given to our collective voices over so many issues and not least the failure to uphold the Constitution - that we're facing a crisis not only of leadership, but within the entire system. We have started our “Mulnivasi Nayak“ on web page to expose the exploitation and injustice wherever occurring by the brahminical forces & awaken the downtrodden voiceless & helpless community.

Our Mission

Media is playing important role in democracy. To form an opinion is the primary work in any democracy. Brahmins and Banias have controlled the fourth pillar of the democracy, by which democracy is in danger. We have the mission to save the democracy & to make it well advanced in common masses.

© 2018 Real Voice Media. All Rights Resereved
 e - Newspaper