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सिंगापुर ने लगाया विवादित फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ पर प्रतिबंध, बताया- भड़काने वाली और एकतरफा

Published On :    10 May 2022   By : MN Staff
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सिंगापुर ने इन्फोकॉम मीडिया डेवलपमेंट अथॉरिटी, मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर, कम्यूनिटी ऐंड यूथ और मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स के साथ मिलकर एक जॉइंट स्टेटमेंट जारी किया है। इसमें कहा गया है कि फिल्म अलग-अलग समुदायों के बीच दुश्मनी बढ़ा सकती है। हमारी अलग-अलग धर्म को मानने वाली सोसायटी की धार्मिक एकता भंग हो सकती है।



मुंबई : 1990 में घाटी से हुए कश्मीरी पंडितों के विस्थापन की कहानी पर एकतरफा बनाई गई विवादित फिल्म द कश्मीर फाइल्स पर सिंगापुर अथॉरिटीज ने प्रतिबंध लगा दिया है. उनका कहना है कि यह फिल्म अलग-अलग समुदायों में मतभेद को बढ़ावा दे सकती है. इतना ही नहीं इसे एकतरफा भी करार दिया गया. कहा गया है कि इस समय चल रहे कश्मीर विवाद में हिंदुओं को सताया गया दिखाया गया है जबकि मुसलमानों का पक्ष छूपाया गया है.


सिंगापुर ने विवेक अग्निहोत्री के डायरेक्शन में बनी फिल्म द कश्मीर फाइल्स को बैन कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिंगापुर अथॉरिटी का माना है कि फिल्म एक तरफा है। सिंगापुर ने इन्फोकॉम मीडिया डेवलपमेंट अथॉरिटी, मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर, कम्यूनिटी ऐंड यूथ और मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स के साथ मिलकर एक जॉइंट स्टेटमेंट जारी किया है। इसमें कहा गया है कि फिल्म अलग-अलग समुदायों के बीच दुश्मनी बढ़ा सकती है। हमारी अलग-अलग धर्म को मानने वाली सोसायटी की धार्मिक एकता भंग हो सकती है। क्लासीफिकेशन गाइडलाइन्स का हवाला देते हुए यह कहा गया कि कोई भी चीज जो सिंगापुर में जाति और धार्मिक कम्युनीटीज को बदनाम करने की कोशिश करता है, उसका क्लासिफकेशन नहीं किया जा सकता.


फिल्म 11 मार्च को भारत में रिलीज हुई थी. इंडिया में भी सोशल मीडिया पर इसको लेकर बहस छिड़ी रही. फिल्म को कई लोगों ने प्रोपागैंडा और मुसलमानों के खिलाफ बताया था. कई लोगों, राजनेताओं ने इस फिल्म की आलोचना कर इसे मुसलमानों के खिलाफ भडकाने वाली फिल्म करार दिया. वहीं यह भी आरोप लगाया गया की उस समय कश्मीरी पंडितों के साथ- साथ मुसलमान और अन्य लोगों पर भी अत्याचार हुए, लेकिन उसे फिल्म में नजरअंदाज किया गया.


बता दें कि फिल्म 1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों के कश्मीर घाटी से पलायन के इर्द-गिर्द घूमती है. सच्चाई यह है कि तब केंद्र में बीजेपी के समर्थन वाली वीपी सिंह की सरकार थी. दूसरी बात यह है कि केवल कश्मीर में पंडितों का विस्थापन नहीं हुआ. छत्तिसगढ़ जैसे राज्यों में आदिवासियों की हजारों हेक्टर जमिन कॉरपोरेट सेक्टर को देकर आदिवासियों को विस्थापित किया गया. उनकी कोई चर्चा नहीं होती न ही केंद्र सरकार इसकी चर्चा करती है. यही नहीं तो देशभर में एससी, एसटी सहीत अल्पसंख्यक लोगों पर कहीं न कहीं धर्म के नाम पर या धर्मांतरण के आरोप में हमले हो रहे है. मॉब लिंचिंग में कई मुसलमानों ने जान गंवाई. देश में हुई दंगों में हजारों की संख्या में मुस्लिम मारे गए और विस्थापित हुए इसकी कोई चर्चा नहीं करती है. लेकिन कश्मीरी पंडितों के विस्थापन का रोना सरकार जरूर रो रही है. इस फिल्म को बीजेपी ने ढाल बनाया हुआ है.


जीस ‘द कश्मीर फाइल्स पर बीजेपी राजनीति कर रही है उस फिल्म में आधा सच दिखाने का भी आरोप लग रहा है. एक आरटीआई कार्यकर्ता को जो जानकारी मिली उसके अनुसार 1990 में घाटी में केवल 89 कश्मीरी पंडित मारे गए. वहीं 1635 अन्य धर्म के लोग भी मारे गए. लेकिन फिल्म के ब्राह्मण निर्माता ने इस घटना को फिल्म में नहीं दिखाया. यह फिल्म समाज में केवल जहर बोने का काम करेगी. और ऐसा हुआ भी. इस फिल्म के आने के बाद धर्म संसद में मुसलमानों के खिलाफ हथियार उठाने का आव्हान किया गया.



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