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ग्लोबल पीस इंडेक्स-2022ः 163 देशों की सूची में 135 वे स्थान पर भारत, लो कैटेगरी में मिला स्थान

Published On :    17 Jun 2022   By : MN Staff
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भारत की समग्र शांति में मामूली 1.4 फीसदी का सुधार हुआ है. हालांकि देश में हिंसक अपराधों और आपराधिक संकेतकों की अवधारणा में तेजी देखी गई. कमजोर अर्थव्यवस्था, कोरोना के बाद राजनीतिक अस्थिरता में वृद्धि और निरंतर सांप्रदायिक हिंसा ने भारत की रैंकिंग को प्रभावित किया



नई दिल्ली : केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार आने के बाद से भारत विश्व स्तर की हर सूची में पिछड़ता जा रहा है. अब वैश्विक शांति सूचकांक, 2022 में भी पिछड़ गया है. ग्लोबल पीस इंडेक्स-2022 में भारत मामुली सुधार के साथ भले ही तीन पायदान ऊपर चढ़ा हो, 163 देशों की सूची में भारत को 135 वे स्थान पर रखा गया है. जो बीते साल 138 वे पायदान पर था. सूचकांक में शांति के मामले में भारत को लो कैटेगरी में रखा गया है. सूची के अनुसार आइसलैंड दुनिया का सबसे शांतिपूर्ण और अफगानिस्तान सबसे अशांत देश है.


पिछले एक साल में भारत की समग्र शांति में मामूली 1.4 फीसदी का सुधार हुआ है. हालांकि देश में हिंसक अपराधों और आपराधिक संकेतकों की अवधारणा में तेजी देखी गई. कमजोर अर्थव्यवस्था, कोरोना के बाद राजनीतिक अस्थिरता में वृद्धि और निरंतर सांप्रदायिक हिंसा ने भारत की रैंकिंग को प्रभावित किया. आइसलैंड 2008 से इस सूचकांक में नंबर एक पर बना हुआ है. सूची में शीर्ष 10 में शामिल देशों में से सात यूरोप के हैं. नागरिक अशांति की वजह से अमेरिका को 129वां स्थान हासिल हुआ, जो 2008 के बाद सबसे निचला स्तर है. दक्षिण एशियाई देशों में भूटान 19वीं रैंक हासिल कर शांति सूचकांक में सबसे ऊपर है. इसके बाद नेपाल (73), श्रीलंका (90) और बांग्लादेश (96) रहे. पाकिस्तान को 147 वे पायदान पर है.


शांति में सबसे ज्यादा गिरावट पांच देशों गिनी, हैती, बुर्किना फासो, रूस और यूक्रेन में हुई. कोरोना के बाद आर्थिक सुधार और रूस-यूक्रेन युद्ध पर अनिश्चितता के बीच दुनियाभर में शांति 14 साल में सबसे निचले स्तर पर है. खाद्य और ईंधन की लागत में वृद्धि ने दक्षिण एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व में खाद्य असुरक्षा व राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ाया है. वैश्विक शांति का औसत स्तर 2021 में 0.3 फीसदी खराब हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर 90 देशों में शांति बढ़ी, जबकि 71 देशों में गिरावट दर्ज की गई.


ग्लोबल पीस इंडेक्स- 2022 में भारत को शांति के मामले में लो कैटेगरी में रखा गया है. ये इंडेक्स घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय संघर्ष, समाज में सुरक्षा और सुरक्षा, और डिग्री ऑफ मिलिटराइजेशन समेत 23 मापदंडों के आधार पर देशों के मूल्यांकन के बाद जारी किया गया है. यूरोप सबसे शांतिपूर्ण क्षेत्र बना हुआ है. आइसलैंड, डेनमार्क, हंगरी और फिनलैंड यूरोप के 10 सबसे शांतिपूर्ण देशों में शामिल हैं.


बता दें कि विश्व शांति सूचकांक को इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (आईईपी) के द्वारा तैयार किया जाता है. इसमें देश, क्षेत्रों के शांति स्तर की स्थितियों के अनुसार रैंकिंग दी जाती है. सूची में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और सैन्यीकरण समेत 23 मापदंडों के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है.


बता दें कि अगर शिक्षा की बात करे तो विश्व की 100 यूनिवर्सिटी में भारत का एक भी विश्वविद्यालय नहीं है. वैश्विक भुखमरी सूची में 116 देशां में भारत 101 स्थान पर है. फ्रीडम ऑफ प्रेस में 150 वे पायदान पर, रूल ऑफ लॉ इंडेक्स में 79 वे स्थान पर, डेमोक्रेसी इंडेक्स में 46 वे स्थान पर है. मानव विकास सूचकांक में भारत 189 देशों में 161 वे स्थान पर, वैश्विक भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक 2021 में भारत 180 देशों में 85 वें स्थान पर है और वर्ल्ड हैप्पीनेस इंडेक्स में भारत 146 देशों में 136वें पायदान पर है. 


यानी हर वैश्विक मापदंड पर भारत पिछड़ता जा रहा है. धार्मिक आजादी के मामले में भी भारत की स्थिति काफी दयनीय है. एक अमेरिकी रिपोर्ट में भारत में धार्मिक आजादी की स्थिति नकारात्मक बताई गई है. यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजस फ्रीडम की तरफ से 2021 की जारी वार्षिक रिपोर्ट में भारत में धार्मिक आजादी की स्थिति को नकारात्मक करार दिया गया है. भारत को चिंताजनक हालात वाले देशों की लिस्ट में रखने की सिफारिश की गई है. रिपोर्ट में भारत में धार्मिक आजादी बाधित करने, कट्टर धार्मिक संगठनों का समर्थन करने की निंदा की गई.



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