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रोहतक में डीएनए परिषद डीएनए परिषद का विरोध, नागपूर संघ कार्यालय पर वामन मेश्राम लेकर जायेंगे लाखों लोगों का मोर्चा?

Published On :    19 Jun 2022   By : MN Staff
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वामन मेश्राम के कार्यक्रम का विरोध जारी रखेंगे और कार्यक्रम नहीं होने दिया तो वामन मेश्राम ने नागपुर के संघ कार्यालय पर कम से कम एक लाख लोगों का मोर्चा लेकर जाने की बात कहीं है.



पूना : भारत मुक्ति मोर्चा द्वारा 27 जून 2022 को वामन मेश्राम की अध्यक्षता में एक डीएनए परिषद होने वाली है. यह परिषद जाट भवन, सेक्टर 1, रोहतक हरियाणा में होने वाली है, लेकिन इस परिषद के होने के पहले से ही ब्राह्मणों द्वारा विरोध शुरू हो गया है. सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार, अगर ब्राह्मण रोहतक में वामन मेश्राम के कार्यक्रम का विरोध जारी रखेंगे और कार्यक्रम नहीं होने दिया तो वामन मेश्राम ने नागपुर के संघ कार्यालय पर कम से कम एक लाख लोगों का मोर्चा लेकर जाने की बात कहीं है.


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दरअसल ये कार्यक्रम ना हो तथा रोहतक में आने के लिए वामन मेश्राम पर प्रतिबंध लगाया जाए, इसके लिए हरियाणा और विशेष तौर पर रोहतक के ब्राह्मणों ने बीते 17 जून को डीएम को ज्ञापन सौंपा है. इतना ही नहीं बल्कि कार्यक्रम के आयोजकों पर कानूनी कार्रवाई करने की भी मांग की गई है. चूंकि राज्य में भाजपा की सरकार है और प्रशासन पर शासन का दबाव रहता है, इसलिए इस मामले पर डीएम ने भी उन्हें इन बातों के लिए आश्वस्त किया है.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अभी वामन मेश्राम की राज्य स्तरीय रैलियों के कार्यक्रम हर राज्य में चल रहे है. उसी अभियान के अंतर्गत हरियाणा के रोहतक में भारत मुक्ति मोर्चा की राज्य स्तरीय महारैली होने वाली है, जिसे ब्राह्मणों ने विरोध करने का काम किया है. डीएनए के अनुसार ब्राह्मण विदेशी है ये अब वैज्ञानिक दृष्टिकोन से साबित हो गया है. इसलिए ब्राह्मण नहीं चाहते कि उनके विदेशी होने की जानकारी बहुजन समाज के लोगों तक ना पहुंचे. अगर यह जानकारी मूलनिवासी बहुजनों को पहुंचती है तो ब्राह्मणों के विरोध में विद्रोह खड़ा हो जाएगा. यह ना हो इसलिए खासतौर पर रोहतक के ब्राह्मण डीएनए परिषद का विरोध कर रहे है.


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आपको बता दें कि कुछ साल पहले गुजरात के ब्राह्मणों ने वामन मेश्राम का इसी प्रकार का विरोध किया था. हालांकि वामन मेश्राम ने डंके की चोट पर गुजरात के कच्छ में अपना विशाल कार्यक्रम लिया था और आज भी उनके लाखों की संख्या वाले कार्यक्रम न केवल कच्छ में बल्कि सारे गुजरात में और देश भर में चल रहे हैं.

गौरतलब है कि इस परिषद के उद्घाटक के तौर पर मा.शमशेर सिंह मलिक (कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष, चौधरी सर छोटूराम विचार मंच), मुख्य अतिथि मा.गुरनाम सिंह चढूनी (राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन चढुनी), मुख्य वक्ता के रुप में मा.डा.विलास खरात (राष्ट्रीय महासचिव, भारत मुक्ति मोर्चा) आने वाले है. जिन एससी, एसटी और ओबीसी के लोगों का ब्राह्मणों ने आज तक हिंदु के नाम पर इस्तेमाल किया, उन्हें गुलाम बनाकर रखा, वही एससी, एसटी और ओबीसी के लोग उन्हें और उनके धर्म को छोड़कर चले जायेंगे. ये खतरा ब्राह्मणों को सता रहा है. इसलिए ब्राह्मण डीएनए की चर्चा पर रोक लगाना चाहते है, उसकी चर्चा बंद कराना चाहते है.


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गुजरात के बाद अब हरियाणा के ब्राह्मणों ने जिस तरह से वामन मेश्राम का विरोध किया है, उसका ज्यादा फायदा वामन मेश्राम और उनके संगठन को ही मिलता दिखाई दे रहा है. इससे एक बात सामने आई है कि कल तक ब्राह्मणों ने जिन एससी, एसटी और ओबीसी का इस्तेमाल किया, अब वे लोग ब्राह्मणों के विरोध में खड़े हो रहे है. इसलिए ब्राह्मण अब खुद ही सामने आकर वामन मेश्राम का विरोध कर रहे है. अन्यथा इसके पहेल ब्राह्मण बहुजनों को ही बहुजनों के साथ लड़ाते थे, उनका मुसलमानों के विरोध में इस्तेमाल करते थे, लेकिन आज बामसेफ जैसे सामाजिक संगठनों की जागृति की के चलते ब्राह्मणों को इस्तेमाल करने के लिए कोई मिल नहीं रहा है. इसलिए उनको खुद ही विरोध करना पड़ रहा है. गुजरात के बाद हरियाणा के ब्राह्मण शायद समझ नहीं पा रहे है कि उनके इस तरह के विरोध का फायदा वामन मेश्राम को ही मिलता है. ये बात महाराष्ट्र के ब्राह्मण भलीभाँति जानते है. इसलिए वे सामने आकर वामन मेश्राम का विरोध नहीं करते. प्राप्त जानकारी के अनुसार, अगर ब्राह्मण रोहतक में वामन मेश्राम के कार्यक्रम का विरोध जारी रखेंगे और कार्यक्रम नहीं होने देंगे, तो वामन मेश्राम नागपुर के संघ कार्यालय पर कम से कम एक लाख लोगों का मोर्चा लेकर जायेंगे. बाबा साहब डॉ.अम्बेडकर ने एक जगह लिखा है की ‘नाक दबाओगे, तो मुंह खुलेगा’, इस कहावत को वामन मेश्राम अब अमलीजामा पहनाने की योजना पर काम कर रहे है. नागपुर का संघ कार्यालय वैसे भी अनु.जाति के लोगों की बस्ती से घिरा हुआ है. देश भर से एक लाख लोगों का मोर्चा संघ कार्यालय पर लेकर जाना वामन मेश्राम के लिए कोई बड़ी बात नहीं है.


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गौरतलब है कि सरसंघचालक मोहन भागवत एक तरफ ऐलानियां कह रहे है की भारत के सभी लोगों का डीएनए एक है. वहीं दूसरी तरफ देश के ब्राह्मण डीएनए पर कोई चर्चा होने नहीं देना चाहते है. मोहन भागवत लगातार अपने कार्यक्रमों में डीएनए को लेकर बयानबाजी करते आ रहे है. लेकिन इससे एक सवाल उठता है की जब किसी टीवी चैनल या अखबार में डीएनए पर कोई बहस या कोई चर्चा नहीं हो रही तब सरसंघचालक डीएनए के मुद्दे पर किसे जवाब दे रहे है? उन्हें  डीएनए  पर बोलने की क्यों जरूरत महसूस हो रही है? कौन उन्हें इस विषय पर बोलने के लिए मजबूर कर रहा है? इन सवालों के जवाब रोहतक, हरियाणा के डीएनए परिषद को लेकर हो रहे ब्राह्मणों के विरोध के बाद मिल रहे है.



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