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ईवीएम में गडबड़ी : हाई कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त को 27 सितंबर को किया तलब

Published On :    16 Sep 2023   By : MN Staff
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याचिका में सवाल किया गया था कि वोटिंग और वोटिंग गिनती की दो दिन में जाहीर किए गये आंकडों में अंतर कैसे हो सकता है? चुनाव के दौरान ईवीएम में गडबड़ी के लिए जिम्मेदार कौन?



मुंबई : साल 2019 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान सोलापुर निर्वाचन क्षेत्र में कथित ईवीएम छेड़छाड़ मामले में उच्च न्यायालय ने कल राज्य और केंद्रीय मुख्य चुनाव आयुक्तों को तलब किया। इन दोनों चुनाव अधिकारियों को 27 सितंबर को कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया गया है. इस मामले में गवाह के तौर पर उनका बयान दर्ज किया जाएगा और 26 और 27 सितंबर को आगे की सुनवाई होगी. अदालत ने हैदराबाद स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के अधिकारियों और वैज्ञानिकों को २६ सितंबर को गवाह के रूप में पेश होने का भी निर्देश दिया है.


दरअसल साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान महाराष्ट्र के सोलापुर लोकसभा चुनाव क्षेत्र में कुछ ईवीएम में गड़बड़ी होने की बात सामने आई थी. इसके बाद मुंबई हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई. याचिका में सवाल किया गया था कि वोटिंग और वोटिंग गिनती की दो दिन में जाहीर किए गये आंकडों में अंतर कैसे हो सकता है? चुनाव के दौरान ईवीएम में गडबड़ी के लिए जिम्मेदार कौन? इस याचिका पर सुनवाई के दौरान सोलापुर जिला निर्वाचन अधिकारी ने खुद ईवीएम में गड़बड़ी हाने की बाद हाई कोर्ट में स्वीकार की है. इसके बाद हाईकोर्ट ने सीधे देश के मुख्य चुनाव आयुक्त को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया.


मालुम हो कि मध्यप्रदेश के भिंड ज़िले के अटेर में ईवीएम मशीन के डेमो के दौरान किसी भी बटन को दबाने पर वीवीपैट पर्चा बीजेपी का निकलने के बाद ज़िले के कलेक्टर को हटा दिया था. चुनाव आयोग नेइस मामले की पूरी जानकारी राज्य की निर्वाचन अधिकारी सेलिना सिंह से मांगी थी. सेलिना सिंह ने बीबीसी से बातचीत में कहा था कि मशीनें ठीक से कैलिब्रेट नहीं हुई थीं, इसलिए ऐसा मामला सामने आया.


इस मामले की जांच करने पहुंची चुनाव आयोग की टीम ने भी मशीन में ख़राबी पाई थी. भोपाल में मीडिया के सामने इन अधिकारियों ने ये भी बताया है कि इस मशीन का इस्तेमाल यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान कानपुर में किया गया था.


गौरतलब है कि हाल ही में चुनावों पर नजर रखने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में वीवीपैट की सभी पर्चियों को गिनने करने की मांग की है. इस पर चुनाव आयोग ने अपने जवाब में कहा कि अगर वह वीवीपैट की 100 प्रतिशत पर्चियों की गिनती करने लगे तो देश मैन्युअल मतदान के युग में वापस चला जाएगा. यह एक तरह से बैलेट पेपर के माध्यम से मतदान कराने जैसा ही होगा. सवाल यह है कि जब देश की जनता को बैलेट पेपर पर चुनाव कराने से कोई दिक्कत नहीं है तो चुनाव आयोग इससे दूर क्यों भाग रहा है? जब अधिकांश सियासी दलों के साथ ही देश की जनता की भी मांग है कि बैलेट पेपर चुनाव होना चाहिए तो चुनाव आयोग इससे इनकार क्यों कर रहा है?



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